नचारी

                  नचारीे शंकर दु शंकर गाबैत चलु जटा सँ गँगा बहाबैत चलु कैलाश मे आयल जे दीन दुःखीया सबके गला लगाबैत चलु जटा सँ गँगा बहाबैत चलु, हाथमे डमरु बजाबैत चलु मस्तक पर चँन्दन लगाबैत चलु, हाथमे त्रिशुल रखैत चलु गलामे सर्प लगाबैत चलु, अँगोमे विभुत रमाबैत […]

नचारी

तर बहु गँगा, उपर बहु जमुना, बिचे बहु सरस्वती धार गे माई ताही ठाम शिवजी पलंग बिछाओल, जटाके देलखिन छिरिआई गे माई । । फुल लोढ गेलनी गौरी कुमारी, आँचर धय लेल बिल माई गे माई छोरु छोरु आहे शिव मोरे आँचरवा, हम छी बारी कुमारी गे माई । । बाबा मोरा सुन्ता हाती चढि ऐता, भैया बन्दुक लय देखावे गे माई अम्मा सुनती जहर खाय मरति, भावी मोरा खुशी भय बैसती गे माई । । सेहो सुनी शिवजी सिन्दुर बेसाहल, गौरी बेटी राखल बयाही गे माई । ।