बटगवनी

बटगवनी प्रितम प्रित लगाक जाई छी विदेश यो, धरबै जोगीन भेष यो ना अषाढ एक मास बितल, सावन दुई मास बितल आरो बितगेल भादब सन दिन यो, धरबै जोगीन भेष यो ना आशीन आसा लगाओल कार्तीक कँतो नही आयल अगहन मन करैय जइतौहु नैहर यो, धरबै जोगीन भेष यो ना पुष सीरक भरायब माघ रघुबरके […]

बटगवनी

                बटगवनी स्नेहीया लगाकँ दागा देलकै सखी हे, प्रितीया लगाके दागा देलकै सखी हे इ हम जनीतौहु सखी हे, पीया चली जैतासे ठोकीतहुँ बज्र केबार सखी हे, स्नेहीया ….. बज्र केबार सखी हे खुजी फुजी जेतैसे बन्तिहुँ अंचरा के खुट सखी हे, स्नेहीया ….. अँचराके खुट सखी हे […]

बटगवनी

  दधि मागे जशोधा के लाल, कि गोकुल हम ना जइबे पनिया भरन गेली, ओही जमुनमा, ओही कन्हैया ठार, गोकुल हम ना जइबे दधिया बेचन गेली ओही बृन्दावन, ओही कन्हैया ठार, गोकुल हम ना जइबे मारे बसुलीया फोरे गँगरीया यहि मोहन के चाल, गोकुल हम ना जइबे कौडी खेलन गेली यही बृन्दावन, ओही कन्हैया ठार, […]

बटगवनी

चानन भेल बिषम सर रे, भुषन भेल भारी सपनेहु हरि नही आयल रे, गोकुल गिरधारी अश्गर ठाडी कदम तर रे, पथ हेरथी मुरारी हरि बिनु देह दगध भेल रे, झाझर भेल सारी जहाँ जहाँ तोहे जाहुँ उधव रे, मधुपुर जाहुँ चन्द्र वदन नही जिवत रे, वध लागल भारी भन्हि विधापती गावल रे, सुनु गुणवती नारी […]

बटगवनी

कुन्ज भवन सं निक्सल रे रोकल गिर धारी एक ही नगर बसुँ माधव रे, जनी करु बट्मारी छोरु कन्हैया मोरा आचँर रे, फाट्त नव सारी अपजस् होयत जगत भरी रे, करिय उधारी सँगक सखी सब आगु आयत रे, हम असगर नारी दामिनी दमक तुलाईल रे, एक रात अन्हारी भन्हि विधापती गावल रे, सुनु गुणवती नारी […]