मैथिली गीत

मैथिल बिबाहक गीत  मुठी एक उँच छथीन सीयाके सजनवाँ हे ।। २सिया के सजनवा सखि हे दशरथ के ललनवाँ हे ।। २मुठी एक उँच छथीन ………. श्यामल गोर किशोर मनोहर आयल जनक भवनमाँ हे माथपर हुनका चमकै छैन लालेलाल चन्दनमाँ हे मुठी एक उँच छथीन …….. दशरथ गोर कौशिल्या गोरी राम भरत किया करीया हे […]

मैथिली गीत

                    मैथिली गीत किए नै कहलौ पहिने, हमरा सँ प्रेम अइँछ हमरासँ मिललेल हिया बेचैन अइँछ किए नै कहलौ पहिने, किया नै कहलौ पहिने हमरा सँ प्रेम अइँछ हमरासँ मिल लेल, हमरा सँ मिल लेल हिया बेचैन अइँछ किए नै कहलौ पहिने ….. नयनमा त कहिते […]

मैथिली गीत

                 मैथिली छैठके गीत  ( तर्जः विध्यापती )   कार्तीक महिना चितचोर सजनिगे । शैन दिन परैछै घाट भोर सजनिगे ।।   ठकुआ पकेबै भुसबा बनेबै    । २ ।। नरीयल आ नेबो राखिक डाला सजेबै डाला लक जायब घाटक ओर सजनिगे ।। कार्तीक महिना …….   कल जोडी छठी माईके […]

मैथिली गीत

मैथिल  ( बिबाहक गीत ) मुठी एक उँच छथीन सीयाके सजनवाँ हे ।। २ सिया के सजनवा सखि हे दशरथ के ललनवाँ हे ।। २ मुठी एक उँच छथीन ………. श्यामल गोर किशोर मनोहर आयल जनक भवनमाँ हे माथपर हुनका चमकै छैन लालेलाल चन्दनमाँ हे मुठी एक उँच छथीन …….. दशरथ गोर कौशिल्या गोरी राम […]

मैथिली गीत
मैथिल गीत
October 1, 2013

बहीना सिया के दुल्हा श्यामल चितचोर गे देवर लखन छथीन गोर गे ना ।।   जखन राम अबध सौँ चलला बनमे तारका सुबाहु के मारला – २ उनका चरण के धुइल सौँ  बैनगेल पत्थल सौँ नारगे ।। देवर लखन छथीन गोर गे ना ।।   राजा जनकजी स्वंयम्बर कएला त्खन राम जनकपुर अयला धनुष के […]

मैथिली गीत

    भैया भौजी संगमे एकटा कार ऐलैय, भौजी के देखैला गामक लोग ऐलैय   भैया लक लक भौजि छथीन मोट लगै छथीन भौजी बाछी सौं छोट बुझाइय जेना आँगनमे छोट मोट हाती चलैय भौजी के देखैला ……………….. देखैला सब लोग गप करैय भौजी घरमे मेकअप करैय देखमें हमरा कोयल स कनिक गोर लगैय भौजी के […]

मैथिली गीत

श्रावन मे घटा घनघोर सजनी गे, पिया नही आयल – कन्त नही आवल मोर सजनी गे – २ चारो दिश घेरे रामा कारी रे बदरिया, दोसर मे छैक रामा घोर अन्हरिया थर थर काँपे जिया मोर सजनी गे, श्रावन मे घटा घनघोर सजनी गे । । बादल गरजे बिजुली चमके, चारो दिशा दादुर गीत सुनावे […]

मैथिली गीत
मैथिली गीत
July 9, 2013

साबनके महिना मे परैछै पनिया कि झुमैछै खेतमेँ किसान रे । राती अन्हरिया बाजै पपिहरा कखन हेतै बिहान रे । । २ । ।   छुपु छुपु धान रोपै किसान सब गाबैछै बिरह के गीत । कान्हा पर कोदारी आ माथपर गगरी करै छै आपस मे प्रित । । होते भिनसर मे उठे किसनबा बनबैछै […]