मैथिली सायरी
मैथिली सायरी
June 21, 2013

अछि आस बस अहिँसँ, हमर साँस अछि अहिँसँ देखीते रही अहिँके, केहन पिआस अछि अँहिसँ दु किनार जेना नदीके, कोना भेलै जिनगी अपन अहि समयके काटि लेबै,से बिश्वास अछि अहिँसँ….!   छम छम पाजेब बाजि उठल सुनि मोन मयूर नाचि उठल हृदयक सुखल नदीमे जेना प्रीतक अचानक बाढि उठल…!     राति रहै कतबो जे […]